राकेश टिकैत बोले- सिंघू बॉर्डर पर हमारा मंच और पंच , सरकार आज बात करे या अगले साल

नई दिल्ली। तीन नए कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनकारी किसान संगठनों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। टीकरी बॉर्डर पर आयोजित किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज फिर दोहराया कि कृषि कानून रद्द होने के बाद ही ‘घर वापसी’ होगी। उन्होंने कहा कि, जब तक कानून वापस नहीं लिए जाएंगे, आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेता देश में लगातार महापंचायतें कर रहे हैं।

राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत कहा कि, हम पंचायती प्रणाली को मानने वाले लोग हैं। हम फैसलों के बीच में न पंच बदलते हैं और न ही मंच बदलते हैं। हमारा दफ्तर सिंघु बॉर्डर पर ही रहेगा और हमारे लोग भी वहीं रहेंगे। जो सरकार की लाइन थी बातचीत करने की उसी लाइन पर वह बातचीत कर लें। केंद्र चाहे तो आज बात कर ले या 10 दिनों में या अगले साल, हम तैयार हैं। हम दिल्ली से बैरिकेड्स हटाए बिना नहीं जाएंगे।

राकेश टिकैत ने कहा, किसानों का विरोध प्रदर्शन अनिश्चित समय तक जारी रहेगा, क्योंकि वर्तमान में इसकी कोई योजना नहीं है। यह अक्टूबर तक भी जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि भारत तो आजाद हो गया, तो गुजरात कैद में क्यों है। गुजरात के आदमी को दिल्ली नहीं आने दिया जा रहा है। जो लोग दिल्ली आना चाहते हैं उनको जेल में बंद करते हैं, हम गुजरात भी जाएंगे।

कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की है। इसके लिए आगे आने वाले दिनों में देशभर में ‘किसान महापंचायत’ आयोजित की जाएगी। किसान संगठनों ने इस कदम का ऐलान अपनी मांगों को लेकर 18 फरवरी को देशभर में चार घंटे के लिए ‘रेल रोको’ आंदोलन की घोषणा करने के एक दिन बाद किया। मोर्चा ने साफ कर दिया है कि जब तक विवादित तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता एवं उनकी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी नहीं दी जाती तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

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