टूलकिट मामला: दिशा रवि के बाद पुलिस रडार पर ये महिला! जानें- कौन हैं निकिता जैकब, जिन्होंने ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट का किया रुख?

दिल्ली पोलिक टूलकिट मामले में 21 साल की जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को रविवार को बंगलूरू से गिरफ्तार किया है। अब इसी मामले में पुलिस ने एक और महिला कार्यकर्ता-वकील निकिता जैकब के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट जारी करवाया है। जिसके बाद निकिता जैकब ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया।

दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में जैकब और एक अन्य आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। जैकब ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पी. डी. नाइक की एकल पीठ से याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करेगा। जैकब ने चार सप्ताह के लिये ट्रांजिट अग्रिम जमानत की मांग की है, ताकि वह दिल्ली में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने के लिये संबंधित अदालत का रुख कर सके।

न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चार दिन पहले स्पेशल सेल की टीम निकिता जैकब के घर गई थी। उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जांच की गई। एएनआई के मुताबिक, पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्थापक धालीवाल ने कनाडा में रहने वाले अपने सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया था। मकसद था गणतंत्र दिवस से पहले ट्विटर पर एक तूफान खड़ा करना। गणतंत्र दिवस से पहले एक ज़ूम मीटिंग हुई जिसमें मो धालीवाल, निकिता, दिशा और अन्य ने भाग लिया।

 

निकिता जैकब पेशे से वकील हैं, जो कि दीवानी विवादों के लिए कोर्ट में लड़ती हैं। निकिता सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के मामलों को उठाने वाली कार्यकर्ता हैं। निकिता खुद को एक महत्वाकांक्षी लेखिका और एक गायक भी बताती हैं। वह एक शौकिया फोटोग्राफर और कुक भी हैं। वह आगे लिखती हैं, ‘मैं वर्गों में भेदभाव नहीं करना चाहती। मैं किसी भी उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों के साथ आसानी से संवाद कर सकती हूं और जुड़ सकती हूं।’

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि (21) को गत शनिवार को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद, दिल्ली की एक अदालत ने उसे रविवार को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हुए जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने यह ‘टूलकिट’ साझा की थी। ‘टूलकिट’ में ट्विटर के जरिये किसी अभियान को ट्रेंड कराने से संबंधित दिशानिर्देश और सामग्री होती है। कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘टूलकिट’ भारत में प्रदर्शनों को हवा देने की उनकी साजिश का ‘‘सबूत’’ हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.