डिसइंगेजमेंट पर राहुल के सवालों का रक्षा मंत्रालय ने दिया जवाब, कहा-मीडिया में फैलाई जा रही हैं गलत सूचनाएं

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भारत-चीन सीमा पर डिसइंगेजमेंट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को राहुल गांधी के सवालों पर नौ सूत्री खंडन जारी करते हुए कहा कि, भारत ने चीन को किसी भी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया है और अभी भी मतभेदों को सुलझाया जाना बाकी है। भारत ने इस समझौते के परिणामस्वरूप किसी भी क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है। इसके विपरीत, उसने LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पालन और सम्मान लागू किया है।

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यह दावा कि भारतीय क्षेत्र फिंगर 4 तक है, गलत है। भारत के क्षेत्र को भारत के नक्शे के अनुसार दर्शाया गया है और इसमें 1962 से चीन के अवैध कब्जे के तहत वर्तमान में 43,000 वर्ग किलोमीटर जमीन शामिल है। यहां तक कि भारतीय धारणा के अनुसार, LAC, फिंगर चार में नहीं है, वह फिंगर 8 में है। पैंगोंग त्सो लेक में वर्तमान में चल रहे डिसइंगेजमेंट को लेकर कुछ गलत सूचनाएं और भ्रमित टिप्पणियां मीडिया और सोशल मीडिया में चल रही हैं।

मंत्रालय ने कहा है कि, पैंगोग सो के उत्तरी किनारे पर दोनों तरफ की स्थायी चौकियां टिकाऊ और बखूबी स्थापित हैं। भारत चीन के साथ मौजूदा सहमति समेत फिंगर आठ तक गश्त करने के अपने अधिकार का निरंतर इस्तेमाल करता रहा है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हॉट स्प्रिंग गोगरा और देपसांग वैली में भी जो विवाद है, उसे भी सुलझा लिया जाएगा। पैंगोंग में सैनिकों की वापसी के 48 घंटे बाद इन क्षेत्रों भी पूर्व की स्थिति बहाल करने को लेकर बात शुरू की जाएगी।

राहुल गांधी ने आज कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय क्षेत्र को चीन को क्यों दिया? इसका जवाब उन्हें और रक्षा मंत्री को देना चाहिए। क्यों सेना को कैलाश रेंज से पीछे हटने को कहा गया है? देपसांग प्लेन चीन वापस क्यों नहीं मांगा गया? हमारी जमीन फिंगर-4 तक है। पीएम मोदी ने फिंगर-3 से फिंगर-4 की जमीन चीन को दे दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी चीन के खिलाफ खड़े नहीं हो सकते।

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