‘कैपिटल हिल घटना और लाल किला हिंसा के दौरान अकाउंट्स पर कार्रवाई में फर्क क्यों?’

केंद्र सरकार अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्विटर’ पर नकेल कसने की तैयारी में है। बुधवार रात को ही सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर अधिकारियों से बातचीत का ब्योरा रिलीज किया। इसमें बताया गया है कि आईटी सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ट्विटर अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत की। इसमें उन्होंने पश्चिमी देशों और भारत में ट्विटर के अलग-अलग बर्ताव का मुद्दा उठाया। साथ ही भारत के नियम न मानने के लिए कंपनी को सीधे शब्दों में चेतावनी भी दी।

क्या है विवाद?: सरकार ने 4 फरवरी को ट्विटर से ऐसे 1178 अकाउंट पर रोक लगाने को कहा जिनका जुड़ाव पाकिस्तानी और खालिस्तानी समर्थकों के साथ पाया गया है और जिनसे किसानों के प्रदर्शन के संबंध में भ्रामक और भडकाऊ सामग्री साझा की गयी। कुल मिलाकर ट्विटर ने 1,000 से ज्यादा अकाउंट पर कार्रवाई की है। इनमें से 500 पर सरकार ने रोक लगाने की मांग की थी।

सरकार की शिकायत के आधार पर ट्विटर ने कुछ घंटे के लिए कुछ अकाउंट्स पर रोक लगाई थी, पर फिर से इसे बहाल कर दिया था। इसके बाद सरकार ने आदेश का पालन नहीं होने का नोटिस जारी किया और कानूनी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी। बुधवार को ट्विटर ने ब्लॉगपोस्ट में बताया कि उसने सरकार के निर्देश पर भ्रामक और भड़काऊ विषयवस्तु का प्रसार रोकने के लिए 500 से ज्यादा अकाउंट पर रोक लगा दी है और कुछ को ब्लॉक कर दिया है।

क्या हुआ सरकार-ट्विटर की मीटिंग में?: ट्विटर के इस कदम के बाद बुधवार को ही आईटी सचिव अजय प्रकाश साहनी और ट्विटर की ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी की वाइस-प्रेसिडेंट मोनीक मेशे और ट्विटर के कानूनी मामलों के वाइस-प्रेसिडेंट जिम बेकर के बीच मीटिंग हुई। सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, बैठक में कैपिटल हिल हिंसा और लाल किले में हुई हिंसा के मुद्दे पर ट्विटर के दोहरे रवैये को लेकर चर्चा हुई।

दो घंटे तक चली मीटिंग में भारत की तरफ से कहा गया, “ट्विटर को अभिव्यक्ति की आजादी के साथ खड़ा न देखना, बल्कि ऐसे लोगों का साथ देते देखना जो आजादी को अपशब्द कहते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डालते हैं, काफी निराशा पैदा करने वाला है।”

 

बयान में कहा गया- “सचिव ने मीटिंग में हैशटैग Farmer Genocide का मुद्दा ट्विटर अधिकारियों के सामने उठाया और इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि कैसे ट्विटर ने सरकार के इमरजेंसी ऑर्डर के बावजूद हैशटैग और इससे जुड़ा कंटेंट हटाने में काफी समय लिया। ऐसे समय जब गैरजिम्मेदाराना कंटेंट स्थिति को भड़का सकता है, तब गलत जानकारी फैलाना और किसानों के नरसंहार जैसा आधारहीन हैशटैग चलाना न तो पत्रकारिता की आजादी है और संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी।” बयान में आगे कहा गया कि सरकार की तरफ से कानूनी तौर पर ट्विटर का इस ओर ध्यान दिलाए जाने के बावजूद प्लेटफॉर्म ने इस हैशटैग को लंबे समय तक चलने दिया, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।

भारत का कानून मानना जरूरी:  सरकार ने इस मीटिंग में ट्विटर से कहा कि जिस तरह से आधिकारिक तौर पर फर्जी, बगैर सत्यापित, गुमनाम और ऑटोमेटिक अकाउंट को अनुमति दी जाती है। उससे इस प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी और बेहतर बातचीत होगी, इस बात पर संदेह पैदा होता है। बताया गया है कि बैठक में ट्विटर से भारत के कानून मानने के लिए भी कहा गया। सचिव ने कहा कि कोई भी आदेश तुरंत माना जाना चाहिए, फिर चाहे कंपनी की नीति कुछ भी हो। जिस जगह कंपनी बिजनेस करती है, उस पर उस जगह का ही कानून लागू होता है। कुछ दिनों बाद सरकार का कोई आदेश मानना बेमतलब है।

सरकार ने ट्विटर के अधिकारियों से यह भी कहा कि उनकी कंपनी का भारत में बिजनेस करने के लिए स्वागत है, लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जबकि वह भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करे। सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि किसी भी कंपनी को देश में होने पर भारतीय संसद के द्वारा पारित कानूनों का पालन करना ही होगा। भले ही इससे इतर कंपनियों के नियम जैसे भी हों।

 

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