“PM मोदी-शाह हैं मेरे दोस्त, जाता हूं BJP में तो गलत क्या है?”

पश्चिम बंगाल चुनाव से ऐन पहले TMC चीफ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को झटका देने वाले दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि उन्हें BJP ज्वॉइन करने के लिए न्यौते की जरूरत नहीं है। भगवा पार्टी में जाने से जुड़ी खबरों को लेकर पूछे जाने पर अंग्रेजी समाचार चैनल NDTV को उन्होंने बताया- दिनेश त्रिवेदी को किसी निमंत्रण का इंतजार नहीं करना पड़ता है। वे सभी मेरे दोस्त हैं, अब से नहीं…पहले से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं। अमित भाई भी सालों से मेरे करीबी मित्र हैं। मैं चला गया होगा…और इसमें कुछ गलत भी नहीं है। कल को अगर मैं बीजेपी में चला जाऊं, तब इसमें कुछ गलत नहीं होगा।

बकौल त्रिवेदी, “अगर वे (भाजपाई) मेरा स्वागत (जैसा मैंने सुना है) कर रहे हैं, तब मैं उनका आभारी हूं। अगर हर जगह उन्हें लोगों ने स्वीकारा है, तब कुछ तो वे देश के लिए अच्छा कर रहे होंगे।” दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने शुक्रवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा उच्च सदन में की। बाद में उन्होंने औपचारिक रूप से अपना त्यागपत्र राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को सौंपा, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

त्रिवेदी ने ‘‘पश्चिम बंगाल में हिंसा’’ और ‘‘घुटन’’ का हवाला देते हुए जब उच्च सदन में त्यागपत्र देने की घोषणा की तो उस समय आसन की तरफ से उनकी इस पेशकश को यह कहकर अस्वीकार कर दिया गया कि इसके लिए उन्हें समुचित तरीका अपना पड़ेगा। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बाद में त्रिवेदी ने सभापति नायडू से उनके कक्ष में मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया।

सूत्रों के अनुसार नायडू ने उनसे पूछा कि वह किसी दबाव में तो इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, इसके जवाब में त्रिवेदी ने कहा कि वह बिना किसी दबाव के ‘‘अंतरात्मा की आवाज’’ पर यह कदम उठा रहे हैं। इससे पहले, उच्च सदन में बजट चर्चा के दौरान आसन की अनुमति से त्रिवेदी ने कहा, ‘‘हर मनुष्य के जीवन में एक ऐसी घड़ी आती है जब उसे अंतरात्मा की आवाज सुनाई देती है। मेरे जीवन में भी यह घड़ी आ गयी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां बैठकर सोच रहा था कि हम राजनीति में क्यों आते हैं? देश के लिए आते हैं..देश सर्वोपरि होता है।’’ त्रिवेदी ने कहा कि जब वह रेल मंत्री थे तब भी उनके जीवन में ऐसी घड़ी आयी थी जिसमें यह तय करना पड़ा था कि ‘‘देश बड़ा है, पक्ष बड़ा है या खुद मैं बड़ा हूं।’’ तृणमूल सदस्य ने कहा, ‘‘जिस प्रकार से हिंसा हो रही है, हमारे प्रांत में…मुझे यहां बैठे-बैठे लग रहा है कि मैं करूं क्या? हम उस देश (राज्य) से आते हैं जहां से रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, खुदीराम आते हैं।’’

 

उन्होंने उच्च सदन में इसी सप्ताह नेता प्रतिपक्ष के विदाई भाषण के दौरान आजाद और उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भावुक हो जाने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘असल में हम जन्मभूमि के लिए ही हैं और कुछ नहीं। मुझसे देखा नहीं जा रहा कि मैं करूं तो क्या करूं। एक पार्टी से बंधा हूं। मैं अपनी पार्टी का आभारी हूं कि उसने मुझे यहां (राज्यसभा में) भेजा।’’ त्रिवेदी ने कहा, ‘‘मगर अब मुझे घुटन हो रही है। उधर अत्याचार हो रहे हैं… मुझे मेरी अंतरात्मा की आवाज यह कह रही है कि यदि आप यहां बैठकर चुपचाप रहो… इसके बजाय यहां से त्यागपत्र देकर बंगाल चले जाओ और लोगों के साथ काम करो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज यहां से त्यागपत्र दे रहा हूं तथा देश एवं बंगाल के लिए जिस प्रकार काम करता रहा हूं, आगे भी करता रहूंगा।’’ इस पर उपसभापति हरिवंश ने त्रिवेदी से कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकते हैं क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्हें एक समुचित प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। उन्हें इस बारे में सभापति से बात करनी चाहिए। त्रिवेदी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में तीन अप्रैल 2020 को उच्च सदन के सदस्य बने थे और उनका वर्तमान कार्यकाल दो अप्रैल 2026 तक है। संप्रग शासनकाल में त्रिवेदी रेलमंत्री थे और उन्होंने 2012 में रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

भाजपा ने किया स्वागत, तृणमूल ने कृतघ्न करार दियाः तृणमूल कांग्रेस ने त्रिवेदी को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद उन्हें ‘कृतघ्न’ करार दिया। वहीं, दूसरी ओर भाजपा ने उन्हें भगवा पार्टी में शामिल होने का न्योता देने में तनिक भी देरी नहीं की। राज्य विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ने के कयासों के बीच त्रिवेदी का इस्तीफा आया है। त्रिवेदी के इस्तीफे से नाराज तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व एवं जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात किया है। बता दें कि त्रिवेदी करीब दो महीने से तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाए हुए थे।

 

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