बुंदेलखंड में गांवों को पानीदार बनाने की अहम पहल

वर्षा बूंदों को खेत में रोकने के लिए देश की पहली मेड़बंदी यज्ञ यात्रा का शुभारंभ बुंदेलखंड के बांदा जिले के ओरन गांव से हुई। उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री प्रो. डॉ. महेंद्र सिंह ने फावड़े से खेत की मेड़ बना उस पर पेड़ लगाकर इसकी शुरुआत की। उन्होंने स्वयं मेड़बंदी के लिए श्रमदान किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जो वर्षा जल को रोकेगा, भारत माता के कोख में पानी भरेगा, उसे सिद्धि-प्रसिद्धि और समृद्धि मिलेगी।

जल में ही अमृत है, जल में ही ऊर्जा है, जल में ही सारे देवता वास करते हैं, जल ही जीवन है। कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में यूपी का बुंदेलखंड पानीदार होगा। कहा कि समाज और सरकार मिलकर मेड़बंदी सहित परंपरागत तरीके से वर्षा जल को रोकने की कोशिश करेंगे। बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सपनों को हम सब मिलकर पूरा करेंगे। एक-एक बूंद जल को हमें बचाना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल आंदोलन को जन आंदोलन में बदलने के लिए स्थानीय जखनी गांव के किसानों ने पुरखों की जिस विधि को खोज कर खेत और गांव को पानीदार बनाया, उसका नाम मेड़बंदी है। यह विधि सूखा प्रभावित देश के प्रत्येक राज्य के लाखों गांवों तक बिना किसी प्रचार-प्रसार के पहुंच गई। खेत और गांव को पानीदार बनाने वाली इस विधि में किसी प्रकार के प्रशिक्षण या नवीन ज्ञान या मशीन या शिक्षा संसाधन की आवश्यकता नहीं है। अपने श्रम से कोई भी किसान युवा मजदूर फावड़े और लकड़ी की टोकरी मात्र से वर्षा का पानी रोक कर अपने खेत को पानीदार बना सकता है।

जखनी के किसानों ने जल योद्धा उमा शंकर पांडे के नेतृत्व में बगैर सरकार की सहायता के समुदाय के आधार पर परंपरागत तरीके से अपने खेतों में पानी रोकने के लिए दो दशक पहले खेत में मेड़, मेड़ पर पेड़ विधि से वर्षा जल को रोकने की शुरुआत की थी। इसी विधि ने जखनी को देश का पहला जलग्राम बनाया। देश को 11 सौ से अधिक जल ग्राम देने की प्रेरणा दी है।

जखनी के किसानों की भांति हर गांव को प्रयास करना होगा। गांव में रहने वाले जल योद्धा उमा शंकर पांडे से जल संरक्षण की प्रेरणा लेनी होगी। छोटे-छोटे परंपरागत प्रयोग ही बड़ा बदलाव लाते हैं। मेड़बंदी जल संरक्षण की सबसे पुरानी पुरखों की विधि रही है। जिसे जखनी के किसानों ने जागृत किया है। देश के किसानों ने लाखों हेक्टेयर भूमि में अपनी श्रम मेहनत से मेड़बंदी की है, पेड़ भी लगाए हैं। पेड़ से अतिरिक्त आमदनी ले रहे हैं। जखनी के किसानों ने अंधेरा-अंधेरा कहने के बजाय स्वयं मिट्टी के दीपक को जलाकर उजाला करने की कोशिश की है। ऐसे ही दीपक देश के लाखों नौजवानों को जल जोड़ने के लिए जलाने होंगे, तभी हम जलयुक्त दीपावली मनाएंगे। पर्यावरण शुद्ध होगा। सरकार ने भी अपनी विभिन्न योजनाओं में मेड़बंदी के लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से सिंचाई विभाग के माध्यम से योजनाएं उपलब्ध कराई है। किसान और सरकार के सहयोग से भूजल स्तर ऊपर आ रहा है।

उमा शंकर पांडे के नेतृत्व में जखनी के किसानों ने जो प्रयोग भू जल संरक्षण की दिशा में किया है उससे जखनी का नाम बांदा का नाम उत्तर प्रदेश का नाम देश दुनिया में हुआ है। प्रधानमंत्री जी ने देश भर के प्रधानों को मेड़बंदी सहित परंपरागत तरीके से वर्षा जल को रोकने के लिए पत्र लिखा है। उसका बड़ा असर हुआ है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी के नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय मेड़बंदी को प्रेरित कर रहा है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जी के नेतृत्व में मेड़बंदी के माध्यम से जल रोकने के लिए देश भर की सूखा प्रभावित ग्राम पंचायतों ने कोरोना काल में गांव की श्रम शक्ति को स्वरोजगार देकर जल संरक्षण के लिए प्रयास किया है। इस अवसर पर बांदा चित्रकूट के लोकसभा सांसद आरके सिंह पटेल ने कहा कि मेड़बंदी ही मात्र ऐसी विधि है जो भूजल रोककर खेतों को पानीदार बना सकता है। भले ही यह विधि देश दुनिया में जखनी के नाम से जानी जाती हो, लेकिन यह विधि पुरखों की है। जखनी ने इसे फिर से जागृत किया है।

कहा कि देश को परंपरागत तरीके से जल संरक्षण की विधि देने वाला जखनी गांव मेरे संसदीय क्षेत्र का गांव है। मैं जखनी के किसानों को बधाई देता हूं। जल ग्राम जखनी मेड़बंदी यज्ञ अभियान के संस्थापक जल योद्धा उमा शंकर पांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए उनका आभार जताया। कहा कि उन्होंने मेड़बंदी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी। स्वयं देश भर के प्रधानों को मेड़बंदी के माध्यम से जल रोकने के लिए पत्र लिखा। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ जी का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री जी की जल समस्या की चिंता को गंभीरता से लेते हुए यहां जल शक्ति मंत्रालय बनाया, जबकि देश के अन्य राज्यों में अब भी यह नहीं है। कहा कि बुंदेलखंड प्रयोग, परिवर्तन, दिशा,धर्म, साहित्य, शिक्षा-दीक्षा की भूमि है।

प्रधानमंत्री जी ने अपने प्रथम कार्यकाल के दौरान इसी भूमि में जल शक्ति मंत्रालय बनाने की घोषणा की थी और इसी भूमि से अपने दूसरे कार्यकाल के शुभारंभ में जल शक्ति मंत्रालय बनाकर उद्घाटन भी किया। कहा कि प्रदेश के जल शक्ति मंत्री के हाथों मेड़बंदी यज्ञ यात्रा के शुभारंभ से इतिहास बनेगा। जल शक्ति सचिव यूपी सिंह. नीति आयोग के जल सलाहकार अविनाश मिश्रा ने इस विधि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए कई बार हमारे किसानों से संवाद किया। खुद गांव आए, मेड़बंदी के प्रति सरकार गंभीर है।

चित्रकूट धाम मंडल के कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप चित्रकूट धाम मंडल में मेड़बंदी के माध्यम से जल संरक्षण किया जाएगा। मेड़ के ऊपर पेड़ लगाए जाएंगे। मेड़बंदी विधि जल संरक्षण की दिशा में प्रमाणित पुरखों की सबसे सरल विधि है। बुंदेलो भूजल चौपाल के संयोजक भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष कार्यसमिति सदस्य राजेश द्विवेदी ने कहा कि जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह जी ने स्वयं फावड़ा उठाकर श्रमदान देकर पौधरोपण कर सामाजिक कार्यकर्ताओं का जिस प्रकार मनोबल बढ़ाया है, ऐसे प्रयासों से ही स्वयंसेवक तैयार होते हैं।

तिंदवारी बांदा के विधायक बृजेश प्रजापति, बबेरू बांदा के विधायक चंद्रपाल कुशवाहा, मऊ मानिकपुर के विधायक आनंद शुक्ला, उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री शिव शंकर पटेल, भाजपा बांदा के जिला अध्यक्ष रामकृष्ण निषाद, मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा, उप जिलाधिकारी जेपी यादव समेत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले से आए दो जल सेवकों को जल चेतना सम्मान प्रदान किया गया। 13 जिलों के 30 जल दूतों को जल शक्ति मंत्री ने सम्मानित किया। बुंदेलखंड की पहली भू जल चौपाल में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, युवा शक्ति ने सहभागिता की। जल योद्धा उमा शंकर पांडे के नेतृत्व में यह मेड़बंदी यज्ञ रथ यात्रा 6 माह में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिलों के सूखा प्रभावित 111 गांव की यात्रा करेगी। खेत पर मेड़ मेड़ पर पेड़ इसका मूल मंत्र होगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.