कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में किसानों ने राहुल गाँधी के फाड़े पोस्टर, काफिला रोक कर दिखाए काले झंडे

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में किसानों ने शुक्रवार (12 फरवरी 2021) की राहुल गाँधी के पोस्टर फाड़े और विरोध में नारे लगाए। श्रीगंगानगर में उनका काफ़िला रोक कर काले झंडे भी दिखाए। राहुल गाँधी राजस्थान के दो दिवसीय दौरे पर थे और इस दौरान उन्हें कृषि क़ानूनों पर भाषण भी देना था। दो दिवसीय दौरे के पहले दिन राहुल गाँधी ने पीलीबंगा और श्रीगंगानगर में रैलियों को सम्बोधित किया।

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए जयवीर सिंह नाम के किसान ने राहुल गाँधी पर आरोप लगाया कि यह दौरा उनके राजनीतिक मुनाफ़े के लिए किया गया है, वह किसानों की समस्याओं पर कोई बात नहीं कर रहे हैं। राहुल गाँधी सिर्फ किसानों को मूर्ख बनाने का प्रयास कर रहे थे। जयवीर सिंह ने कहा, “हम पिछले 3 महीनों से कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं लेकिन आज जो हुआ उसे कॉन्ग्रेस रैली कहा जाना चाहिए। ये लोग किसानों का झंडा लेकर हमें बेवकूफ़ बना रहे हैं। जब हमने 1 नवंबर को कृषि क़ानूनों के विरोध में मार्च निकाला था तब कॉन्ग्रेस सरकार ने किसानों को जयपुर में दाख़िल होने की अनुमति नहीं दी थी। ये लोग कह रहे हैं कि भाजपा सरकार किसानों में दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दे रही है, तो इनकी (कॉन्ग्रेस) सरकार कैसे अलग हुई?”

किसानों के नाम पर राहुल गाँधी की राजनीतिक रैली: किसान

जयवीर सिंह ने कहा कि किसान राहुल गाँधी से बात करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मिलने की अनुमति माँगी। अनुमति भले दी गई थी, लेकिन बाद में किसानों को उनसे मिलने नहीं दिया गया था। जयवीर सिंह के अनुसार, “वह (राहुल गाँधी) हमसे मिले बिना बच्चों की तरह चले गए, इसलिए हमने उनके पोस्टर फाड़े और हम ये फिर से करेंगे।” एक और किसान ने कहा कि राहुल गाँधी किसानों से बात नहीं करना चाहते थे, वह सिर्फ अपनी रैली में भीड़ इकट्ठी करना चाहते थे। किसानों का आरोप है कॉन्ग्रेस ने यह रैली सिर्फ अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए की थी। इसके लिए उन्होंने किसान आंदोलन का इस्तेमाल किया।

कैसे कॉन्ग्रेस ने दी आंदोलन की चिंगारी को हवा

यह दिलचस्प है कि किसानों ने जयपुर में राहुल गाँधी का विरोध तब किया जब कॉन्ग्रेस किसानों के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने में लगी हुई है। कॉन्ग्रेस के लिए सिर्फ एक बात अहमियत रखती है, कैसे इस मौके का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए किया जाए। कॉन्ग्रेस पहले इन्हीं क़ानूनों की वकालत कर रही थी। अब वही कॉन्ग्रेस प्रदर्शनकारियों का पूरा समर्थन कर रही है।

हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने ऐसी टिप्पणी की जो हमेशा की तरह एक व्हाट्सएप फॉरवर्ड’ ही साबित हुआ। उन्होंने कहा था, “इस मामले का कोई अंत नहीं है। सरकार अपने अभिमान में ऐसा सोचती है कि वह किसानों को लाचार कर सकती है, लेकिन किसानों को बेवकूफ़ नहीं बनाया जा सकता है। भारत के किसान प्रधानमंत्री से ज़्यादा जानते हैं। इस मुद्दे का इकलौता हल यही है कि सरकार कृषि सुधार क़ानूनों को वापस ले।”

इसके पहले राहुल गाँधी ने कहा था कि 3 कृषि क़ानूनों के चलते भारत का कृषि क्षेत्र 2-3 उद्योगपतियों के पास चला जाएगा। इस तरह की निराधार बयानबाज़ी के भीषण परिणाम हुए थे, पंजाब में तमाम जियो (jio) टावर्स में तोड़फोड़ की गई थी। खुद पंजाब के मुख्यमंत्री ने पूरे फसाद का विरोध किया था, लेकिन असल में उनकी ही पार्टी ने इस पूरे विवाद को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

आंदोलन के दौरान कॉन्ग्रेस ने खूब डर पैदा किया जिसकी वजह से खालिस्तानी तत्व खुल कर सामने आए और उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर आंदोलन को हिंसात्मक रूप दे दिया। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस ने पूरे षड्यंत्र को खुद बढ़ावा दिया वहीं खुद जयपुर में किसानों को प्रवेश की अनुमति तक नहीं दी। एक तरफ कॉन्ग्रेस आक्रामक होकर प्रधानमंत्री मोदी सरकार पर हर तरह के हमले कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनी सरकार वाले राज्यों को इन सबसे दूर रखना चाहती है।

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