गलवान घाटी में भारत ने दी थी कड़ी टक्कर, मारे गए थे चीन के 45 जवान, रूस की न्यूज एजेंसी का दावा

भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर पिछले 9 महीने से ज्यादा समय से तनाव बरकरार रहा है। दोनों देशों के बीच विवाद ने विकराल रूप उस वक्त ले लिया, जब 15-16 जून को गलवान घाटी पर दोनों देशों के सैनिक आपस में भिड़ गए थे। इस खूनी झड़प में जहां भारत के 20 सैनिकों की जान गई थी, वहीं चीन की तरफ से भी कई के मारे जाने की खबर थी। हालांकि चीन ने कभी अपने मृत और घायल सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया था। अब रूस की तास (TASS) न्यूज एजेंसी ने कहा है कि उस मुठभेड़ में चीन के कम से कम 45 सैनिकों की मौत हुई थी।

तास ने भारत-चीन के बीच जारी सैनिकों के पीछे हटने की बातचीत पर जो रिपोर्ट निकाली है, उसमें कहा गया है कि मई और जून में दोनों देशों की सेनाएं भिड़ीं और इसमें भारत के 20 सैनिक और चीन के 45 जवानों की जान गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना के बाद ही दिल्ली और बीजिंग ने क्षेत्र में सैनिकों की संख्या बढ़ा ली और दोनों तरफ 50-50 हजार सैनिक जुटा लिए गए।

अमेरिकी मैगजीन भी कर चुकी है ऐसा ही दावा: लद्दाख के गलवान घाटी में हुई झड़प को लेकर अमेरिकी अखबार न्यूजवीक ने भी बड़ा खुलासा किया था। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जवानों के साथ 15 जून को हुई झड़प में 40-45 नहीं बल्कि 60 चीनी सैनिकों की मौत हुई थी। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गलवान में हिंसा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इशारे पर हुई थी। जिसमें चीनी सेना पूरी तरह नाकाम रही।

भारत-चीन के बीच अब तक 9 राउंड की बातचीत: बता दें कि भारत और चीन के बीच पिछले साल मई से ही टकराव की स्थिति बन गई थी। दोनों सेनाओं के बीच कमांडर स्तर की अब तक 9 वार्ताएं हो चुकी हैं। इनमें गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स से पीछे हटने पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा हुई। हालांकि चीन लंबे समय तक अड़ियल रवैया रखे रहा। बाद में भारतीय सेना ने चुशुल सेक्टर में कुछ अहम पहाड़ियों पर कब्जा किया था, जिससे भारत को कूटनीतिक बढ़त मिली थी।

 

चीन ने किया सेना को पीछे हटाने का ऐलान, भारत ने की पुष्टि: गौरतलब है कि एक दिन पहले ही चीन ने बयान जारी कर कहा था कि दोनों देशों की सेनाएं एक साथ पीछे हटने पर सहमत हुई हैं और इसकी शुरुआत की जा चुकी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, भारत और चीन के ग्राउंड कमांडर मंगलवार और बुधवार पैंगोंग सो के उत्तर और दक्षिणी तट पर मिले और पीछे हटने के कदम उठाए।

इसके बाद भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राज्यसभा में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच पैंगोंग सो से पीछे हटने का समझौता हो गया है। दोनों ही देश पैंगोंग सो से पूरी तरह पीछे हटने के बाद अन्य जगहों पर तनाव का हल भी निकालेंगे। राजनाथ ने दावा किया था कि बातचीत से भारत ने कुछ भी नहीं खोया है।

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